लिखने और बोलने की गति में अंतर है। साधारण तौर पर जिस गति से कà¥à¤¶à¤² से कà¥à¤¶à¤² वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हाथ से लिखता है, उससे चौगà¥à¤¨à¥€, पाà¤à¤šà¤—à¥à¤¨à¥€ गति से वह संà¤à¤¾à¤·à¤£ करता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वकà¥à¤¤à¤¾ के à¤à¤¾à¤·à¤£ अथवा संà¤à¤¾à¤·à¤£ को लिपिबदà¥à¤§ करने में विशेष रूप से कठिनाई उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो जाती है। इसी कठिनाई को हल करने के लिये तà¥à¤µà¤°à¤¾à¤²à¥‡à¤–न के आविषà¥à¤•ार की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ी।
आशà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿ की बहà¥à¤¤ सी पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ हैं। आशà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿ के सà¤à¥€ तरीकों में पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ पà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ होने वाले कà¥à¤› शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ वाकà¥à¤¯à¤¾à¤‚शों के लिठसंकेत या लाघव निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ होते हैं। इस विधा में सà¥à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इन संकà¥à¤·à¥‡à¤ªà¥‹à¤‚ का उपयोग करके उसी गति से लिख सकता है जिस गति से कोई बोल सकता है। संकà¥à¤·à¥‡à¤ª विधि वरà¥à¤£à¥‹à¤‚ पर आधारित होती है। आजकल बहà¥à¤¤ से सॉफà¥à¤Ÿà¤µà¥‡à¤¯à¤° पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ आटोकमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤Ÿ आदि की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ है जो आशà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿ का काम करती है।
आशà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— उस काल में बहà¥à¤¤ होता था जब रिकारà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग मशीनें या डिकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ मशीने नहीं बनीं थीं। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सà¥à¤•à¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ तथा पतà¥à¤°à¤•ारों आदि के लिठआशà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿ का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ अनिवारà¥à¤¯ माना जाता था।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤¼à¥€ में यà¥à¤µà¤¾à¤“ के लिये अचà¥à¤›à¤¾ कॅरियर है, यह 12 वी ककà¥à¤·à¤¾ के बाद किया जा सकता। इसे लिखने की कई पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ मे है- हिनà¥à¤¦à¥€ मे ऋषि पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€, विशिषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€, सिह पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ आदि है। वैसे हर लेखक की अपनी à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ बन जाती है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° पर कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ या संसà¥à¤¥à¤¾ के गोपनीय रिकॉरà¥à¤¡à¥‹à¤‚ को संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ का दायितà¥à¤µ रहता है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° अपने अधिकारी के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ विशà¥à¤µà¤¨à¥€à¤¯ पद है। इस पद पर काम करना à¤à¤• गरिमापूरà¥à¤£ व चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° के पद अदालतों, शासकीय कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚, मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚, रेलवे विà¤à¤¾à¤—ों में होते हैं। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° का कोरà¥à¤¸ करने के लिठकड़े परिशà¥à¤°à¤® की आवशà¥à¤•ता होती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस à¤à¤¾à¤·à¤¾ में शबà¥à¤¦ गति होना आवशà¥à¤¯à¤• है। à¤à¤• कà¥à¤¶à¤² सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° बनने के लिठउस विषय की à¤à¤¾à¤·à¤¾ का वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ होना अतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¤° बनने के लिठ100 शबà¥à¤¦ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट की गति उतà¥à¤¤à¥€à¤°à¥à¤£ करना आवशà¥à¤¯à¤• होता है।